STORYMIRROR

Deepika Mawar

Abstract

4  

Deepika Mawar

Abstract

मैं भी नारी आप भी नारी

मैं भी नारी आप भी नारी

1 min
495

मैं भी एक नारी और आप भी एक नारी

जीवन में आए चाहे कोई दुविधा भारी


नारी अपने प्रयासों से विजय होकर मानी

देनी पड़ी चाहे कितना त्याग कितनी कुर्बानी 


कभी बेटी बनकर रिश्तों को है निभाया

कभी पत्नी बनकर रिश्तों को महकाया


कभी बहन बनकर परिवार को सजाया

कभी माँ बनकर बच्चों पर ममता को लुटाया


आज इन्हीं रिश्तों के कारण नारी ने सम्मान पाया

पूरे विश्व ने यह दिन महिलाओं को समर्पित किया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract