STORYMIRROR

Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

4  

Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

मानव एक तो जातियाँ क्यों अनेक

मानव एक तो जातियाँ क्यों अनेक

1 min
365

इसका जवाब खुद से पुछो

मिल जाएगा जवाब फिर

चलते हैं हम भारत यात्रा पर

सिंधु घाटी से इतिहास पढ़ें

जाति कर्म आधारित थी

समाज में था संतुलन

करते थे सब अपना कर्म

निभाकर अपने कर्तव्य

फिर आया वैदिक काल

उत्तर में कर्म पर थे हम

पूर्व में जन्म पर आ गए

और जैसे जैसे गुजरा वक़्त

हम जाति पर निर्भर हो गये


अंग्रेजों ने बांटा पहले हमें

आज स्वयं मिलकर बांट रहे

करते हैं बात अब जातियों की

निर्धारण किया था कर्म पर

एक व्यवस्था समाज में

बनकर रहे बिना भेद के

ज्ञान सौंपकर ब्राह्मण बनाये

रक्षा वाले क्षत्रिय कहलाये

व्यापार करने वाले वणिक

और समाज सेवा वाले क्षुद्र


ज्ञान मुख से दिया गया

ब्राह्मण इसलिए कहलाये

भुजा करती रक्षा हमारी

क्षत्रिय हमने इसलिए बनाये

बिन व्यापार चले न जीवन

इसलिए पेट वणिक को दिया

यहाँ तक हिस्सा आधा हुआ

बचा आधा भाग सबने

निम्न तबकों को दिया

सोचो गर पैर न हो

कैसे गति कर पाओगे

इसलिए सबसे अहम भाग

इन्हें दिया गया

बनाकर समाज का आधार


फिर भी सबको यही लगा

उनका शोषण सवर्णों ने किया

इतिहास में ब्रिटिश के गुलाम रहे

मुगलों ने राज किया

इन्होंने क्या किया फिर

शोषण नहीं किया तो

अब तो पहले भारत की सोचो

फिर जाति, धर्म की बात करो

सोच बदलोगे सब बदलेगा

अन्यथा कुछ नहीं

होकर गुलाम फिर से

हम वहीं पहुँच जायेंगे

जहाँ से आजादी मिली

मेरी पहचान भारत से हो

जाति, धर्म से नहीं

एक बात बोलकर

बात खत्म करूँगा अपनी

भारत मेरी पहचान है

ना हिन्दू हूँ ना हूँ ब्राह्मण

मैं खुद हूँ हिन्दुस्तान



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational