अंजनी कुमार शर्मा 'अंकित'
Abstract
माँ ममता की खान है, करती सुत को प्यार।
माँ की सेवा जो करे, मिटते कष्ट अपार।।
मिटते कष्ट अपार, सुख-संपत्ति घर आवै।
जग में ना हो हार, सदा ही आदर पावै।।
कहे 'अंजनी कुमार', पूज्य होती है माता।
रिश्ता ये अनमोल, जगत माँ के गुण गाता।।
बेरोजगारी का ...
सिर्फ तुम
रे मन! यह संस...
सबको नया नया ...
जीवन जलता रहत...
आदर्श परिवार
दोस्ती इसलिए ...
ठंडी का मौसम
मेरा प्यारा भ...
आराधक को जीवन में मिले सुख व आराम। आराधक को जीवन में मिले सुख व आराम।
नानी ने रखा है टोकरी भर भर के आम अब उन्हें खाने की बारी आई। नानी ने रखा है टोकरी भर भर के आम अब उन्हें खाने की बारी आई।
सुरक्षित हो पाएंगी गाय माता और उन्हें इंसाफ मिलेगा। सुरक्षित हो पाएंगी गाय माता और उन्हें इंसाफ मिलेगा।
हर मन्जर पे करोना से खौप में चेहरे कुछ गरीब,अमीर,बुढे, युवा सब अनजाने से मेरे ! हर मन्जर पे करोना से खौप में चेहरे कुछ गरीब,अमीर,बुढे, युवा सब अनजाने से मेरे !
क्योंकि … भारत को देवों ने, वीरों ने रचाया है। इंडिया को लालची, अंग्रेजों ने बसाया है क्योंकि … भारत को देवों ने, वीरों ने रचाया है। इंडिया को लालची, अंग्रेजों ...
पानी का जहाज छोटी सी तूफान में डूब जाता है ऐसा क्यों होता है ? पानी का जहाज छोटी सी तूफान में डूब जाता है ऐसा क्यों होता है ?
वो ही चेहरे सूर्य से चमकीले होते हैं, जो नेकी, दया, धर्म, सत्य से भरे होते हैं। वो ही चेहरे सूर्य से चमकीले होते हैं, जो नेकी, दया, धर्म, सत्य से भरे होते ह...
चलो इस क़ैद में, एक ख़्वाब सजाया जाए। चलो इस क़ैद में, एक ख़्वाब सजाया जाए।
न्याय के पथ पर चलना सिखाये, बस वही है सच्चा गुरु जो सबसे महान होता है। न्याय के पथ पर चलना सिखाये, बस वही है सच्चा गुरु जो सबसे महान होता है।
औचक चोट में और पुरानी टीस में अंतर है, अब ये बात बखूबी समझ में आती है। औचक चोट में और पुरानी टीस में अंतर है, अब ये बात बखूबी समझ में आती है।
हो हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, बस दुश्मन कहलाए वो । हो हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, बस दुश्मन कहलाए वो ।
संसार की रूपरेखा हो संस्कारों की पीढ़ी हो एक बेटी का सम्मान हो देश का अभिमान हो संसार की रूपरेखा हो संस्कारों की पीढ़ी हो एक बेटी का सम्मान हो देश का अभिमान...
प्रदूषण रहित रखो धरा को कोई विपदा ना आएगी। प्रदूषण रहित रखो धरा को कोई विपदा ना आएगी।
आज वो आये हमारी महफ़िल में अब तो दिल में उतर जाने का जी हैI आज वो आये हमारी महफ़िल में अब तो दिल में उतर जाने का जी हैI
और बेटा बेटा बोलके गले लगती है माँ और बेटा बेटा बोलके गले लगती है माँ। और बेटा बेटा बोलके गले लगती है माँ और बेटा बेटा बोलके गले लगती है माँ।
तभी पेड़ के पीछे से बंंदूक की गोली और किसी के गिरने की आवाज़ आई, " रुक" कह किसी ने सिंह तभी पेड़ के पीछे से बंंदूक की गोली और किसी के गिरने की आवाज़ आई, " रुक" कह किसी ...
टंगे रहते हैं कुछ कुरते अलमारी में यूँ के त्यूँ और नए कुरते से अलमारी भरती जाती है। टंगे रहते हैं कुछ कुरते अलमारी में यूँ के त्यूँ और नए कुरते से अलमारी भरती जा...
मैं पत्थर की मूरत हूँ, मैं झलक विगत की दिखलाऊँ। मैं पत्थर की मूरत हूँ, मैं झलक विगत की दिखलाऊँ।
अपनी धरोहर को बचाकर अपनी धरा को प्रकृति के रंगों से सजाना हैI अपनी धरोहर को बचाकर अपनी धरा को प्रकृति के रंगों से सजाना हैI
वो चमत्कार देखकर न करता नमस्कार है वो कर्म, सच्ची नियत से जीतता संसार है। वो चमत्कार देखकर न करता नमस्कार है वो कर्म, सच्ची नियत से जीतता संसार है।