STORYMIRROR

Kalyani Nanda

Abstract

3  

Kalyani Nanda

Abstract

माँ तू याद बहुत आती है

माँ तू याद बहुत आती है

1 min
12.2K


वो सुहानी रातें ,

तेरी गोदी में सर रखकर तारें गिनना,

तेरी मधुर आवाज में लोरी सुनते हुए सो जाना,

तेरी आंचल में मुहँ छुपाकर वो खिलखिलाकर हंसना,

वो बचपन की सारी बातें याद आ जाती है,

तुझसे दूर रहकर माँ , तेरी याद बहुत आती है ।


तेरे लाड़, प्यार पाकर बड़ा हो गया हूँ ,

तेरे आशीष की छाँव में रहकर कुछ बन पाया हूँ,

आज मैं देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लड़ता हूँ,

तू भी मेरी माँ है, ये धरती भी मेरी माँ है,

दोनों के स्नेह से मैं पला बढा हूँ ,

यहाँ सीमा पर दुश्मनों से लड़ता हूँ,

पर तुझे ना भूल पाता हूँ ,

मैं एक जवान हूँ, माँ का वीर सपुत हूँ,

हर पल तेरी वो मुस्कान याद करता हूँ,

हर तकलीफ में भी मुझे देखते ही जो तेरे होंठो पर आते थे,

तेरा प्यार जो मेरे हौसले बढ़ाता है,

वो प्यार, वो हंसी, सब कुछ याद आ जाती है,

तुझसे दूर रहकर माँ ,तेरी याद बहुत आती है । ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract