माँ तेरी ममता
माँ तेरी ममता
माँ तेरी ममता को बहुत याद करता हूँ,
जब चल देता हूँ,
ख़्वाबों की पोटली को ले साथ,
थामे नयी सहर में....
नयी धुँधली सी आशाओं का हाथ,
दिन भर की....
ज़द्दो-ज़-हद से हार कर,
ख्वाबों की खाली-अधभरी पोटली को,
फिर से काँधे पर टांग कर,
लौट आता हूँ जब,
किराये की इन चार दीवारों में,
माँ तेरी ममता को बहुत याद करता हूँ।
