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Jina Sarma

Abstract Inspirational

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Jina Sarma

Abstract Inspirational

मां से रिश्ता

मां से रिश्ता

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आज बड़ी हो गयी तो

क्या मां को कम समय देती हूं ?

हां सच है, एक कर्मचारी की भूमिका निभाकर

मां से अच्छे से बात भी नहीं होती, 


मां खाना खिलाने के लिए आती

और मैं नाराज़ हो जाती, 

पर भूल जाती पूंछना 

मां तुम नाराज़ तो नहीं !


मां बेटी का अनूठा रिश्ता

हर परिस्थिति में खिल उठता 

शायद मैं बातें कम करुँ

नहीं छोड़ा कभी उनकी चिंता करना।


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