STORYMIRROR

Dr.kamlesh Mishra

Abstract

4  

Dr.kamlesh Mishra

Abstract

मां की महिमा

मां की महिमा

1 min
391


 तेरी महिमा है अपरम्पार 

जगत को कैसे बतलाऊं 

तू कैसे रखती सबका ध्यान 

जगत को कैसे बतलाऊं।

यह मायावी संसार 

न कोई है इसका कोई आधार 

कलयुग के इस सागर की

तू ही नौका और पतवार 

जगत को कैसे बतलाऊं।

मानव का चोला पहने

दानव ने पैर पसारे 

आंखों में लिए छलावा

वाणी में अमृत घोलें।

तब तू ही करायें सच का ज्ञान,

जगत को कैसे बतलाये।

तू एक नहीं सबकी है मैया

जो तुझको माने, वो ही जाने

तू करती है सबका कल्याण 

जगत को कैसे बतलाऊं ।

संसार छोड़ कर जब कोई 

जाता है उस धाम

तब तेरे ही नाम का ,बनता एक जहाज 

जगत को कैसे बतलाऊं।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract