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Rajit ram Ranjan

Abstract

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Rajit ram Ranjan

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माँ का दर्द

माँ का दर्द

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तुम्हें क्या पता, 

कि मेरी माँ ने मुझे 

नाजों से पाला है

तुम माँ का दर्द, 

क्या जानोगी।


तुम्हें तो दिल तोड़ने का भी

दर्द नहीं मालूम

वरना इस क़द्र मुझे तन्हा

छोड़कर नहीं जाती।


तुम्हारा ये प्यार करने का

दिखावा भी छल है

तुम्हें तो लोगों कि आँखों में 

आँशु अच्छे लगते हैं।

 

मुझे समझ नहीं आता, 

कि सच में यार 

तुम्हारे पास दिल हैं भी 

या नहीं।


तुमसे अच्छा तो 

वो बेवफ़ा थी

कम से कम नजरें तो 

मिलाती थी।


तुम्हारा इस क़दर से सताना

बेवजह रुलाना मुझे

सब कुछ अजीब सा 

लगता है।


दिल लगाने के नाम से भी अब 

डर सा लगता हैं !


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