Hardik Mahajan Hardik
Abstract
क्या लिखूँ ?
क्या ना लिखूँ ?
समय जहाँ निकट
भविष्य का अपना
सोचूँ क्या लिखूँ ?
निहित निहितार्थ
विकल्प जो वैकल्पिक
अभाव में अपना जीवन
अपनी पराकाष्ठा लिखूँ ?
इस जाते हुए न...
उस मोड़ पर
जीवन में
न हारे थे, न ...
कुछ जज़्बातों...
हर घर सजाता
दिवाली की रोश...
जगमगाओं रोशनी...
चंद-चंद करके
सरल,सहज, शुद्...
कल तुम पर आरोप लगेगा। शीश आपका स्वयं झुकेगा। औलादें जब देंगी ताना। कल तुम पर आरोप लगेगा। शीश आपका स्वयं झुकेगा। औलादें जब देंगी ताना।
अब खेल खेल हे धर्मराज खेल तू जुआ हर युग मे खेलेगा एक धर्मराज फिर जुआ। अब खेल खेल हे धर्मराज खेल तू जुआ हर युग मे खेलेगा एक धर्मराज फिर जुआ।
याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।। याद रहेगा बस वही, जो पावन साहित्य। लोगों के दिल में सदा, है बन चमके आदित्य।।
खुशियां सदा मिलती हैं उन्हें, जिनको खुशी सबकी प्यारी है। खुशियां सदा मिलती हैं उन्हें, जिनको खुशी सबकी प्यारी है।
शिव शंकर को हम करें, बारंबार प्रणाम। माँ गौरा संग में बढ़ी, जिनकी शक्ति ललाम।। शिव शंकर को हम करें, बारंबार प्रणाम। माँ गौरा संग में बढ़ी, जिनकी शक्ति ललाम।...
तुम करो वो, जो तुम्हें देता है खुशी, मुझे जो हो पसंद, करूं मैं भी वहीं, तुम करो वो, जो तुम्हें देता है खुशी, मुझे जो हो पसंद, करूं मैं भी वहीं,
इक अनोखी चुभन होगी, किसी की जिंदगी को जानकर आंसू भी आ जाएंगे आँखों में, उस दर्द को अपना मानकर । इक अनोखी चुभन होगी, किसी की जिंदगी को जानकर आंसू भी आ जाएंगे आँखों में, उस दर्द ...
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
अब लगाव की चाहना, रखते हैं हम लोग। काम लगे तब मिल सके, यथा समय सहयोग। अब लगाव की चाहना, रखते हैं हम लोग। काम लगे तब मिल सके, यथा समय सहयोग।
तुम! 'तुम' होकर कब लौटोगे...? तुम! 'तुम' होकर कब लौटोगे...?
देखो कैसे झरता है हरसिंगार फूलता है मोगरा फिर-फिर हर बार देखो कैसे झरता है हरसिंगार फूलता है मोगरा फिर-फिर हर बार
दिल चाहे वो कर लो घर में मिलकर कोरोना को भगाया जाए। दिल चाहे वो कर लो घर में मिलकर कोरोना को भगाया जाए।
अपनो का साथ ले जाता था दुखों को बहाके।।।।।।।। हवाओं में गूंजते बुआ और चाची के ठहाके अपनो का साथ ले जाता था दुखों को बहाके।।।।।।।। हवाओं में गूंजते बुआ और चाची के ठ...
तमाम उम्र मेरा दम उसी धूँए मे घुटा- वो इक चिराग था मैने उसे बुझाया है। तमाम उम्र मेरा दम उसी धूँए मे घुटा- वो इक चिराग था मैने उसे बुझाया है।
माँ बाबा मैं आपके सपने उन जन्म पूरे कर जाऊंगा। माँ बाबा मैं आपके सपने उन जन्म पूरे कर जाऊंगा।
लड़ते -लड़ते हो रहे, दोनों ही कंगाल। भला समझता कौन है, कलयुग का जंजाल।। लड़ते -लड़ते हो रहे, दोनों ही कंगाल। भला समझता कौन है, कलयुग का जंजाल।।
सूखती नदियाँ, बढ़ते मरुस्थल सूखती नदियाँ, बढ़ते मरुस्थल
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
न्याय की उम्मीद में कितने लोग बैठे होंगे। न्याय की उम्मीद में कितने लोग बैठे होंगे।
कभी माँ की हाथों से खाने वाले आज उनको देखने को तरस जाते हैं। कभी माँ की हाथों से खाने वाले आज उनको देखने को तरस जाते हैं।