STORYMIRROR

Hansa Shukla

Abstract

3  

Hansa Shukla

Abstract

क्या कहे

क्या कहे

1 min
282

अपनी ही गलतियों की

सजा मिल रही है हमको

किसी और को दोस्तो क्या कहे,

घर मे है बंद, सबक है प्रकृति का


दोहन नहींं विदोहन करते थे

प्रकृति के सुंदर नेमत का,

सब भ्रम टूटा,सब विकास झूठा,

यह सत्य हमें स्वीकारना है,


अब जो बाहर निकले तो,

सम्हल-सम्हल के चलना है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract