शाम
शाम
डिअर डायरी ,
गोधूली बेला में,सब घर वापस आ रहे थे,
सूरज छुप रहा था आसमान में,
पक्षी घोसले में जा रहे थे,
कितना सूंदर नयनाभिराम दृश्य था,
प्रकति में भी जैसे मिलन का उल्लास था
मन करता था समय इस पल यही रुक जाए,
धरती भी आज धानी चुनर ओढ़कर इठलाये।।
