STORYMIRROR

रंजना उपाध्याय

Abstract

3  

रंजना उपाध्याय

Abstract

क्या हो गया

क्या हो गया

1 min
350

इस जमाने को देखो क्या हो गया है

लोभ लालच के चलते मति भ्र्ष्ट हो गया है।


इंसानियत खत्म हो रही जुल्म बढ़ते जा रहे हैं

इस जहां में लुटेरों ने सबको लूटे जा रहे हैं।

इस ज़माने..।


कुछ तो खुश हैं अपनी रूखी सूखी रोटी खाकर

उनकी खुशियों को देखकर कुछ लोग दुःखी हो रहे हैं।


इस विरक्ति भरे अंधेरों में इंसान अच्छा न मिल रहा है

किसी की आवाज सुनकर बेवजह परेशान हो गया है।

इस जमाने..।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract