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Sarita Saini

Abstract

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Sarita Saini

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कुछ भी तो नहीं बदला

कुछ भी तो नहीं बदला

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कुछ भी तो नहीं बदला है तेरे जाने के बाद।

बस थोड़ी सी नादानियॉ थीं जो अब ख़त्म हो गई हैं,

मासुमियत चेहरे की कहीं दफ़्न हो गई हैं।।


खो गई है हर पल मुस्कुराने की अदा भी

ऑखों की नमी छुपाने लगें हैं,

मुस्कुरा के अब ज़िन्दगी भी बिताने लगें हैं।

कुछ भी तो नहीं बदला ..


बस बचपना कहीं गुम हुआ है,

आज थोड़ा बड़े होने का हुनर ने मुझे छुआ है।।

कैसे कह दूँ कि तेरे जाने के बाद सब बदला है ..

कुछ भी नहीं बदला।


सब वैसा ही है,

तुम्हारे चाहने जैसा ही है।


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