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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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कुछ बदलें

कुछ बदलें

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कुछ बदले

किसी का इंतजार किये बिना

क्यों कि जो आप बदल सकते हैं

उसे बदलने के लिये

किसी का इंतजार क्यों।


हालांकि यूँ तो

इंतजार बहुत हुआ है

और लोग कहते हैं कि

सच परेशान तो हो सकता है

लेकिन पराजित नहीं।


शुक्रिया सच की शक्ति की

स्वीकार्यता का

लेकिन उसे परेशान होने का

अपना दर्शन बदलिये।


और सच के साथ खड़े हो जाइये

सच बोल नहीं सकते तो 

क्या बात है

किसी ने बोला है तो

उसके साथ खड़े हो लें

और महसूस करें


सच परेशान नहीं हो रहा है

परेशान कर रहा है

और उसे परेशान करने दें।


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