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Manu Sweta

Abstract

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Manu Sweta

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कुछ बातें

कुछ बातें

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कुछ विचार

मन के उदगार

दिल का आभार

आज भी आता है

जताना मुझको

कुछ यादें


तेरी ढेर सी बातें

वो चांदनी रातें

आज भी आता है

बताना मुझको

एक चांद का टुकड़ा


ठंड में जो सिकुड़ा

और तेरा मुखड़ा

आज भी आता है

देखना मुझको

वो बारिश की बूंदे

वो आंखों को मूंदे


वो टूटी सी छतरी

आज भी आता है

भीगना मुझको

वो पहली सी पाती

जो मैं पढ़ पाती


तो दुनिया बदलती

आज भी आता है

पछताना मुझको।


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