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Shravani Balasaheb Sul

Inspirational

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Shravani Balasaheb Sul

Inspirational

कश्ती

कश्ती

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घाट घाट जाती कश्ती

हर दर पर इंकार पाती कश्ती

फिर अनचाहे भवर के

सब आघात सह जाती कश्ती


किनारे को पाना चाहती कश्ती

मगर लहरों में बहती कश्ती

झूलते हुए झूला जैसे

कोई जीवनगीत कहती कश्ती


ढूंढते हुए किनारा कश्ती

खुद ही का बन गई सहारा कश्ती

तैरना डूबना सब मंजूर कर

समंदर में बन गई अंगारा कश्ती।


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