कृष्ण भक्ति
कृष्ण भक्ति
गोकुल की गलियों में मधुवन बसाए,
जिन्हें देख अनंत सुख - आनंद छाए
श्याम रंग और अधरों पर मधुर मुरली
वृंदावन में गोपियों के संग रास रचाए
माखन मिश्री चुरा बड़े प्यार से खाते
जब लेते नाम तब देख- देख लजाते
वृंदावन के आंगन में खेले खेल निराले
गावण की मिट्टी को अंग अंग में लगाते
यशोदा माता का लाल है नंदकिशोर
भक्तों के मन में लाते उम्मीदों की भोर
कृष्ण के स्नेही रूप ने किया मोहित
कृष्ण कथा सुनाते बनवासी चहुँ ओर
कृष्ण कथा सुनाते बनवासी चहुँ ओर
तुमने अर्जुन को दिया गीता का ज्ञान
पक्ष और विपक्ष में रखा धर्म का मान
ब्रह्मज्ञान के साथ इस संसार रच दिया
आज भी करते उस गीता का सम्मान
संसार के समस्त दुखों को मिटा दिया
अंधकार में विवेक का दीप जला दिया
इस ब्रह्म रूपी हृदय में आप ही समाए
कृपा दिखाकर हर संकट से बचा लिया
