STORYMIRROR

Poetry Lover

Abstract

4  

Poetry Lover

Abstract

कोरोना वायरस

कोरोना वायरस

1 min
796

इंसान की सुविधाएं बनने लग गयी है महामारी,

परस्पर आपस में मिलने तो पड़ गयी है भारी।


युद्ध की रणनीति में बना दिये जैविक हथियार,

खुद को ही डंसकर कर दिया लाखों को बीमार।


जब जब लालसा बड़ी है सबके मन की,

तब तब संकट में पंक्तियाँ लगी तन की।


ये कैसा वायरस छाया है हमारी दुनिया में,

घुट घुट कर रहे गये मानव इस काया में।


परमात्मा से बड़ा बन जिनकी सोच उठ जगी,

अक्सर मौत की दस्तक आयी दौड़ी भागी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract