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Poetry Lover

Abstract

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कोरोना वायरस

कोरोना वायरस

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इंसान की सुविधाएं बनने लग गयी है महामारी,

परस्पर आपस में मिलने तो पड़ गयी है भारी।


युद्ध की रणनीति में बना दिये जैविक हथियार,

खुद को ही डंसकर कर दिया लाखों को बीमार।


जब जब लालसा बड़ी है सबके मन की,

तब तब संकट में पंक्तियाँ लगी तन की।


ये कैसा वायरस छाया है हमारी दुनिया में,

घुट घुट कर रहे गये मानव इस काया में।


परमात्मा से बड़ा बन जिनकी सोच उठ जगी,

अक्सर मौत की दस्तक आयी दौड़ी भागी।


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