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Hem Kuletha hemkuletha@yahoo.com

Tragedy Inspirational

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कोरोना काल

कोरोना काल

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पापा के साथ स्कूटी में स्कूल जाना,

 दोस्तों के साथ खेलना, पढ़ना पढ़ाना।

 याद आती है स्कूल की वह मस्ती,

लेकिन घर में पड़े पड़े आती है अब सुस्ती 

 सब का यही हाल है, मचा हाहाकार है,

 यह कोरोना काल है।


 परिवार के साथ पिकनिक बनाने जाना,

 पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन मजे से खाना।

 मॉल से चीजें खरीद कर मिलती थी खुशी,

 बातें यह याद करके मन होता है अब दुखी।

 हर आदमी लाचार है, फैला अंधकार है,

 यह कोरोना काल है।


 इन दो साल में हर किसी ने कुछ ना कुछ खोया है,

 कोई बेटा, कोई भाई, कोई मां-बाप खो कर रोया है।

 मेरा क्या है! कोरोना खत्म होते ही वह दिन लौट आएंगे,

 जिन्होंने अपनों को खोया है, वे उन्हें कहां से लाएंगे।

 यह मेरा विचार है, बे मतलब बाहर निकलना बेकार है,

 यह कोरोना काल है


 चलो मिलकर आज कसम खाते हैं,

 कोरोना से बचने के सारे नियम अपनाते हैं

 हाथ धोना, मास्क पहनना, दो गज की दूरी आसान है,

 अपने मन को समझा दो, "जान है तो जहान है"

 भविष्य का सवाल है, कहो यह स्वीकार है,

 यह कोरोना काल है।  


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