कोरोना काल
कोरोना काल
वक्त-वक्त का बीत गया।
समय वहीं का वहीं रहा।
कर्मठताओं के साथ ही,
एक समय नि:शब्द रहा।
कोरोना काल का दिन,
बेखबर था , बीत गया ।
साल खतम हो गया।
फिर काल आ गया ।
तबाही मंज़र दिखा
रहा, समय स्तिथि के,
बखूबी निभा रहा है।
बिन सोचे समझे,
निरंतर दर बदर,
बेकार पल याद,
आ रहा, कब खत्म
होगा, ये आज पूछ रहा।
