STORYMIRROR

मिली साहा

Abstract

4  

मिली साहा

Abstract

कोरोना काल में हमारे सहायक

कोरोना काल में हमारे सहायक

2 mins
392

बड़े ही कठिन समय से गुज़र रहा है ज़माना,

विश्वयुद्ध सा माहौल है जब से आया कोरोना,

हमारे सहायक इस दौर में हमारे साथ खड़े हैं,

कोरोना के बीच रहकर हरपल जंग लड़ रहे हैं,


डॉक्टर्स दिन-रात जी जान से कर रहे हैं काम,

करते नहीं अपनी फिक्र और ना करते आराम,

मरीजों का करते इलाज़ लेकर जान हथेली पे,

कितनों की जान बचा रहे हैं आज कोरोना से,


अस्पताल के सभी कर्मचारियों का है योगदान,

इस कोरोना दौर में इन सब का कार्य है महान,

इनके सहयोग से ही कार्य आसान हो जाता है,

और हमारा जीवन भी सुचारु रुप से चलता है,


पुलिस प्रशासन हरदम कठिनाइयों से जूझकर,

निभा रहे अपनी जिम्मेदारी कोरोना से लड़कर,

सख्ती बरत रहे हम पर हमारी जान बचाने को,

गलत न समझो कभी इनके सख्त स्वभाव को,


सफाई कर्मचारी भी इस जंग के वीर सिपाही हैं,

स्वच्छता रखकर यही करते हमारी रखवाली हैं,

अगर ना हों ये लोग तो हर ओर होगी बस गंदगी,

सफाई के बिना सोचो कैसी होगी हमारी जिंदगी,


और भी कितने सहायक करते हमारी सहायता,

जिनके बिना जीवन हमारा कठिनतम हो जाता,

सभी अपना अपना काम जब समय पर करते हैं,

तभी तो हम भी सुचारू रूप से काम कर पाते हैं,


इस कोरोना काल में सबने दिया भरपूर योगदान,

तभी तो हम ढूंढ पा रहे समस्याओं का समाधान,

कोरोना से जंग इनके बिना लड़ा नहीं जा सकता,

इनका सहयोग ही तो हिम्मत की मशाल है बनता,


लॉकडाउन में सबसे बड़ी सहायक रही ग्रहणियां,

जब पूरी तरह से घर पर ठहर गई थी यह दुनिया,

अपनी जिम्मेदारियों को हर पल मन से निभाया,

बिना थके बिना रुके अपने परिवारों को संभाला,


ये सभी सहायक कोरोना समय के हैं सुपरस्टार,

जो हमारी मदद को हर पल हर घड़ी रहते तैयार,

सभी सहायक का दिल से करना चाहिए सम्मान,

जो देकर अपना सहयोग बनाते हैं जीवन आसान।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract