STORYMIRROR

कोई शिकवा नहीं है

कोई शिकवा नहीं है

1 min
906


कोई शिकवा नहीं है

तुझसे ऐ ज़िन्दगी।

आँसू दिए हजारों तो

लाखों के सबक भी दिए।

हर कदम पे गिराया

पर उठना भी सिखाया।

कदम कदम पर

तूने मरहम भी किए।


तू सिखाती रही,

मैं भूलता रहा, नतीजे,

दगा मिले बहुत और

तुझसे सजा भी मिले।

तुझसे नफरत क्या करूँ

तेरा एहसान बहुत है।

ग़म तो दिए बहुत

पर मज़े भी किए।


जा, ना बात कर मुझसे

मैं नाराज़ हूँ तुझसे।

क्यों जा रही है दूर,

मुझे छोड़ मौत के लिए?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational