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Shubham Pandey gagan

Abstract

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Shubham Pandey gagan

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कमाल हो गया

कमाल हो गया

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मेरा अब थक के गिर जाना आम हो गया

फिर से रस्ते पे लग जाना भी कमाल हो गया,


तुम मुझे कहते हो मैं क्या हूँ

तुम्हारा यूँ ज़ुबान से गिर जाना कमाल क्या हो गया,


ताज़्ज़ुब क्यों है मुझे मंज़िल पे देख कर तुझे

मेरा गिर के संभल जाना बेमिसाल हो गया।



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