कलम
कलम
कलम कभी दुश्मन का वार लिखती है
कलम कभी दोस्तों का प्यार लिखती है
कलम कभी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती है
कलम कभी अच्छे कार्य की सराहना करती है
कलम कभी दुख की बौछार करती है
कलम कभी सुख का पैगाम लाती है
कलम कभी किसी का इंतजार लिखती है
कलम कभी किसी की जुदाई का एहसास लिखती हैं
कलम सबके जज्बात लिखती है
कलम 'बेजान 'होकर भी बहुत 'खास' होती है।
