कलम से कागज पे
कलम से कागज पे
कलम से कागज पे
लिखेंगे दास्ताँ नई
कितने ठोकरें खाई
और किससे हुई जुदाई
कौन अपना पराया
कौन समझने में देरी
किए अपनों को दूर पराये
को अपने थी मजबूरी
कलम से लिखेंगे
कविता दिल में छुपी हुई
उपदेश देंगे समाज को
जो करता रहा बुराई
क्या समझता था
लोगों को क्या निकले
कुछ कड़वे थे कौन
सच्चे थे गरम मसाले।
