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Rashmi Prabha

Abstract


5.0  

Rashmi Prabha

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कल का सूरज

कल का सूरज

1 min 272 1 min 272

शान्त नदी,

घनघोर अँधेरा,

एक पतवार और खामोशी

यात्रा बड़ी लम्बी थी !


ईश्वर की करुणा

एक-एक करके

पतवारों की संख्या बढ़ी,


कल-कल का स्वर गूंजा

खामोशी टूटी

अँधेरा छंटने लगा

यात्रा रोचक बनी,


प्यार की ताकत ने

किनारा दिखाया

उगते सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया।


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