कल -आज आज-कल
कल -आज आज-कल
कल -आज -कल
आज -कल करता रहा।
वक्त को मुट्ठी में भरने की,
तमाम कोशिशें करता रहा।
वो कहाँ रूका
वो भी कल -आज
आज- कल करता रहा।
जिंदगी के प्रश्नों के,
खंजर थे,
उस और।
हकीकतों के
मंजर थे,
इस और।
मैं पहुँचने -पहुँचने में,
कल- आज,
आज -कल करता रहा।
