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Gulshan Pammer

Tragedy

4.8  

Gulshan Pammer

Tragedy

किसान

किसान

1 min
93


       

'कि ' से कितनी मेहनत करता भारत का ये किसान ,

सा ' से सारे जग का पेट भरे ,किसान है महान !

तमस्तक हों इसके आगे , हिंदु - सिक्ख ईसाई मुसलमान ,

देकर अपना खून-पसीना, पैदा करता गेहूं-धान , 

लेकिन सब का पेट भरके भी, खुद क्यों भूखा रहे किसान, 

आखिर कब तक यूं ही चलेगा ? बतलाओ भगवान ,

कर्ज, भूख, बीमारी, तंगी ,सब किसान को घेरें ,

कैसे इनसे पिंड छुड़ाऊँ , चिन्ता शाम सवेरे ।

अब तो कोई चमत्कार दिखलाओ भाग्य-विधाता,

चिंता-मुक्त जीवन पा जाये अपना ये अन्नदाता !

जीवन के आकाश से छंट जायें ,बादल ये बदहाली के ,

पामर पूछे कब लौटेंगें,फिर वो दिन खुशहाली के !




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