STORYMIRROR

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

4  

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Classics Inspirational

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया

2 mins
183

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया ?

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया।

कौन करें हम जतन ? सब हों खुश और मगन

खुश हो हर कोई जन, हर कोई एक जन।


खुश रहने को, कहीं जाना है नहीं 

खुशी मिलेगी यहीं, मिलेगी खुशी यहीं 

हमें सारी ही उमरिया।


बांटें -बांटे खुशी, बांटें-बांटें खुशी

खुश हो कर प्यार ढेरों लुटाएं।

हर दम हंसें और मुसकाएं,

हर पल सबको ही हरषाएं।

खुद ही हंसें और हंसाएं,

सब संग हंसते ही रहें हर एक जन।


किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया ?

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया।

कौन करें हम जतन ? सब हों खुश और मगन

खुश हो हर कोई जन, हर कोई एक जन।


खुश रहने को, कहीं जाना है नहीं 

खुशी मिलेगी यहीं, मिलेगी खुशी यहीं 

हमें सारी ही उमरिया।


प्यार तो होती है चाहत,हर एक जन की,

खुश रहने की हसरत, है होती हर एक मन की।

सब चाहें प्यार और खुशी,चाहें होंठों पर हंसी,

हंसी-खुशी बिखरन दें, बिखरन दें हर चेहरे पे हंसी।

हर चेहरे पर बिखेर खुशी, प्यार सब पर ही लुटाएं

सब पर ही प्यार लुटाएं, बिखेर खुशी हर चेहरे पर।


किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया ?

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया।

कौन करें हम जतन ? सब हों खुश और मगन

खुश हो हर कोई जन, हर कोई एक जन।


खुश रहने को, कहीं जाना है नहीं 

खुशी मिलेगी यहीं, मिलेगी खुशी यहीं 

हमें सारी ही उमरिया।


सारे जहां को तो हम अपना बनाएं,

अपनेपन की सुरभि हर कहीं बिखराएं।

हर एक चमन में सुमन खुशी के खिलाएं,

सारे जगत को ही,अपना कुटुम्ब हम बनाएं,

अपना कुटुम्ब हम बनाएं, सबको अपना के

अपना के सबको,अपना कुटुम्ब हम बनाएं


किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया ?

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया।

कौन करें हम जतन ? सब हों खुश और मगन

खुश हो हर कोई जन, हर कोई एक जन।


खुश रहने को, कहीं जाना है नहीं 

खुशी मिलेगी यहीं, मिलेगी खुशी यहीं 

हमें सारी ही उमरिया।


बांटने से खुशियां तो कई गुनी ही हैं होती,

अश्क पोंछें किसी आंख से तो मिलते हैं मोती।

खुशी बांटने का जब हम,हैं करते कोई भी जतन,

झूमती है सारी धरती और, सारा झूमता है गगन,

सारा झूमता है गगन, खुशियां बांटने से,

बांटने से खुशियां, झूमता है गगन सारा।


किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया ?

किस तरह बितावैं हम अपनी उमरिया।

कौन करें हम जतन ? सब हों खुश और मगन

खुश हो हर कोई जन, हर कोई एक जन।


खुश रहने को, कहीं जाना है नहीं,

खुशी मिलेगी यहीं, मिलेगी खुशी यहीं,

हमें सारी ही उमरिया।


मिलेगी खुशी यहीं हमें सारी ही उमरिया,

मिलेगी खुशी यहीं हमें सारी ही उमरिया.....


फिल्म: नदिया के पार

गाने की धुन: कौन दिशा में ले के चला रे बटोहिया...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract