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Amrita Singh

Abstract


4.6  

Amrita Singh

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किनारा

किनारा

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गुजर रही है कुछ इस तरह से 

ये ज़िंदगी ।

किनारो को ढूढ़ती लहर हो 

जिस तरह ।

कभी पास दिखता है 

किनारा

कभी दूर हो जाता है

एक पल मे ।

गुजर रही है कुछ इस तरह से 

ये ज़िंदगी ।

कभी ये लहरे तेज है 

जैसे उफान उठा है ।

कभी ये बेहद शांत है 

मानो संगीत सुना रही है कोई ।

गुजर रही है कुछ इस तरह से 

ये ज़िंदगी ।


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