Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Ranjana Mathur

Inspirational

3  

Ranjana Mathur

Inspirational

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें

1 min
244


ख्वाहिशें दौलत हैं मेरी

उसको छीनो तो भला

ख्वाहिशें जी चाहे जितनी

ज़ोर किसी का क्यूँ भला।


पंख हैं पंछी की मानिंद

और ऊंचे हौसले

छूने को नभ की बुलन्दी

उड़ चले हम उड़ चले।


अनदेखी हैं ये हैं अनामी

रंगो बू से हैं परे

ख्वाहिशों के ले पुलिंदे

क्षितिज छूने उड़ चले

हौसले तगड़े।


कभी-कभी होता गुमां यूं

घन तमन्ना के घिरे हैं

झर रहीं हैं बन फुहारें

आज दिल की ख्वाहिशें।


झूम कर नाचेंगी

नयनों की चमक

बन बूँद तब

गुनगुनाती हैं मल्हारें।


संग पपीहा दादुरैं

मन मयूरा नाचे तक धिन

श्रावणी सुर ताल पर

सरगमों के संग छनन छन

महकी मेरी ख्वाहिशें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational