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Jai Singh(Jai)

Inspirational

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Jai Singh(Jai)

Inspirational

खूब सहे वो भार "

खूब सहे वो भार "

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जैसे समुद्र है गहरा,खूब सहे वो भार

ऐसे ही पिता वृक्ष है,कभी न माने हार

कभी न माने हार,साथ वह पूरा देता

खुशी रहे परिवार,आस में जोखिम लेता

लगा रहे दिन रात ,खूब कमाता वह पैसे

सफल बने संतान ,बात खूब कहे जैसे।


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