STORYMIRROR

Surendra Yadav

Romance

3  

Surendra Yadav

Romance

खुदा का शुक्र

खुदा का शुक्र

1 min
238

इत्तेफ़ाक से ही तुम मिले मुझे, खुदा का शुक्र करता हूं।

तुमसे मिलकर मैं तेरा हो गया, खुदा का शुक्र करता हूं।

लाख अर्जी की उस खुदा से मैंने, वो भी मेरी हो जाए।

शायद अर्जी कबूल हुई अब, खुदा का शुक्र करता हूं।।

अभी दरख्वास्त और भी है उस जमाने नूर से,

झूठी बंदिशें तोड़ कर वो आ जाए पास मेरे।

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance