Shiv Kumar Sharma
Fantasy
खुद से बाहर
निकल के तो देखो
मेरे दोस्त सब दिखेगा
जो नहीं
दिख रहा फिलहाल !
कच्चे पर यह हरा ही रहता कभी ना होता नीला आम। कच्चे पर यह हरा ही रहता कभी ना होता नीला आम।
दोनों : फरेबी साजन से बड़े मनभावन से हो गए नैना चार। दोनों : फरेबी साजन से बड़े मनभावन से हो गए नैना चार।
कब चाहा मैंने के तुम एक पल में मेरे हो जाओ? कब चाहा मैंने के तुम एक पल में मेरे हो जाओ?
फिर क्यों उदास बैठा है, चल इक नई दिशा की ओर।। फिर क्यों उदास बैठा है, चल इक नई दिशा की ओर।।
अब आंखें मिलने पर कही सवाल करती है क्या वो तुम थे ? अब आंखें मिलने पर कही सवाल करती है क्या वो तुम थे ?
आवाहन मन कर्म बोध सत्कार सिंद्धान्त भगीरथ तप सुनिश्चित सहभाग।। आवाहन मन कर्म बोध सत्कार सिंद्धान्त भगीरथ तप सुनिश्चित सहभाग।।
छीन लो मुझसे मेरी ये देह और बिखेर दो मुझे पंचतत्व में। छीन लो मुझसे मेरी ये देह और बिखेर दो मुझे पंचतत्व में।
तुम ऐसी हालात में भी अपना संयम नहीं गँवाओगी ना तुम ऐसी हालात में भी अपना संयम नहीं गँवाओगी ना
सत्य जो समक्ष था मुझपर वो प्रत्यक्ष था मैं निगाहें फेर कर उससे ही बचाता रहा सत्य जो समक्ष था मुझपर वो प्रत्यक्ष था मैं निगाहें फेर कर उससे ही बचाता रहा
और वो ही बन गया दुश्मन यहाँ मेरा मगर देखिए आज़म करी जिसकी नवाजिश है बहुत। और वो ही बन गया दुश्मन यहाँ मेरा मगर देखिए आज़म करी जिसकी नवाजिश है बहुत।
एक घड़ी को गर मिले साथ तेरा तो बांहों में पूरा संसार आ जाये। एक घड़ी को गर मिले साथ तेरा तो बांहों में पूरा संसार आ जाये।
दिल ने मुझको इतना लाचार किया। धीमा धीमा सा तुझसे प्यार किया। दिल ने मुझको इतना लाचार किया। धीमा धीमा सा तुझसे प्यार किया।
एक अजनबी से मुसाफिर की तरह। एक अजनबी से मुसाफिर की तरह।
जिस उषा की प्रतीक्षा में, बैठी हो तुम, वह यहॉं न होगी। जिस उषा की प्रतीक्षा में, बैठी हो तुम, वह यहॉं न होगी।
मालूम ना था क्या होगा अंजाम उसका अजनबी को दिल के करीब समझ बैठा मालूम ना था क्या होगा अंजाम उसका अजनबी को दिल के करीब समझ बैठा
एक ख्वाब देखा है मैंने, उसे मुक्कमल करोंगी क्या ... एक ख्वाब देखा है मैंने, उसे मुक्कमल करोंगी क्या ...
मैं तुमको गले लगा लेता, अपना दर्द सुना देता। मैं तुमको गले लगा लेता, अपना दर्द सुना देता।
पीले पुष्प वाणी वन्दना में, पीली बूँदी मिले प्रसादी में। पीले पुष्प वाणी वन्दना में, पीली बूँदी मिले प्रसादी में।
ले जा जरूरत हो तो मेरी सांसें इनमें महसूस होगी मेरी चाहतें.....२ ले जा जरूरत हो तो मेरी सांसें इनमें महसूस होगी मेरी चाहतें.....२
कल मुलाकात तुझी से न मगर हो ये फ़िर साथ रह आज मगर तू रात भर होने तक कल मुलाकात तुझी से न मगर हो ये फ़िर साथ रह आज मगर तू रात भर होने तक