Shiv Kumar Sharma
Fantasy
खुद से बाहर
निकल के तो देखो
मेरे दोस्त सब दिखेगा
जो नहीं
दिख रहा फिलहाल !
तुम प्रेम का गीत, हृदय का नांद हो मैंने संगीत को मौसम में घुलते देखा है तुम प्रेम का गीत, हृदय का नांद हो मैंने संगीत को मौसम में घुलते देखा है
दिल तो ले ही लिया तुमने घायल कर अपनी इन अदाओं से जान भी ये अब तुम्हारी है चाहे पूछ लो दिल तो ले ही लिया तुमने घायल कर अपनी इन अदाओं से जान भी ये अब तुम्हारी है चाह...
आँखें, जब किसी की पानी से भरी हुई परातें बन जाएं... आँखें, जब किसी की पानी से भरी हुई परातें बन जाएं...
मुझे एक दिन और मिला इस संसार का हिस्सा बनने के लिए। मुझे एक दिन और मिला इस संसार का हिस्सा बनने के लिए।
मैं अपनी हकीकत से खुद को नकार कर खुद की हकीकत खोजने में गुम हो चुका मैं अपनी हकीकत से खुद को नकार कर खुद की हकीकत खोजने में गुम हो चुका
भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना
राग छेड़ा मुख पर पिया, मैं प्रेम रथ का ताज बनूँ । राग छेड़ा मुख पर पिया, मैं प्रेम रथ का ताज बनूँ ।
मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यारी है तो मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यार...
मंत्रमुग्ध होकर इश्क़ की हरी ज़मीन पर जिंदगी के बाद भी, उम्र के बाद भी हमेशा के लिए। मंत्रमुग्ध होकर इश्क़ की हरी ज़मीन पर जिंदगी के बाद भी, उम्र के बाद भी हमेशा ...
इक चूनर है जिसपर उसने खुद टांके थे चांद सितारे आज किसी ने पूछा मुझसे क्या रखा है पास इक चूनर है जिसपर उसने खुद टांके थे चांद सितारे आज किसी ने पूछा मुझसे क्या रखा...
मुझ में अच्छे गुण भी हैं और बुरे गुण भी हैं मुझ में अच्छे गुण भी हैं और बुरे गुण भी हैं
रह लेता हूँ मैं भी अकेला, जैसे रहती हो तुम भी खोई, ये बेपरवाही या और ही कुछ है, तुम तो अब नादाँ नहीं... रह लेता हूँ मैं भी अकेला, जैसे रहती हो तुम भी खोई, ये बेपरवाही या और ही कुछ है, ...
मुझे दगाबाज समझ कभी मुंह फेर मत लेना क्या तुम कर सकते हो मुझसे प्यार उतना? मुझे दगाबाज समझ कभी मुंह फेर मत लेना क्या तुम कर सकते हो मुझसे प्यार...
मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाता रहूं और अपने परिवार को हर खुशी देता रहूं ! मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाता रहूं और अपने परिवार को हर खुशी देता रहूं...
महानगर में हाउसवाइफ महानगर में हाउसवाइफ
दिन भर नियति से लड़, जब मैं थक जाता हूँ तब इन्हीं रंगों को देख, थोड़ा सुख चैन पाता हूँ। दिन भर नियति से लड़, जब मैं थक जाता हूँ तब इन्हीं रंगों को देख, थोड़ा सुख चैन प...
मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा। मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा।
कभी सामने आ खड़ी हो जाती है कभी कदमों के नीचे आ जाती है कभी सामने आ खड़ी हो जाती है कभी कदमों के नीचे आ जाती है
Cgf Cgf
जिन्न ने कहा," जो हुक्म मेरे आका, इस वक्त की यही उचित मांग है।" जिन्न ने कहा," जो हुक्म मेरे आका, इस वक्त की यही उचित मांग है।"