Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Ranjana Sharma

Tragedy

4.3  

Ranjana Sharma

Tragedy

कहर

कहर

1 min
392


हर सुख आ गया

धरा मन! पी भा गया

काली घटा छा गई

मानसून आ गया।


जलमग्न खेत हुए

लील मेह खेत गए

जगमग धरती कहे

सारे लोग सो गए।


आसमान से कहर

डूब गया सारा शहर

मातम क्यूँ छा गया

मानसून आ गया।


मौसम की त्रासदी

बेचैन माँ भारती

छाई कैसी आपदा

मानसून आ गया।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy