Sunita Katyal
Abstract
करूँ मैं क्या
खोल किताब घंटो बैठी रहती हूँ
आँखों के सामने
पर नजारा विराट तेरे खेल का होता है
जीवन की परेशा...
हवा के साथ बह...
किसी से नहीं ...
हमें क्या
रात ये कह कर ...
जीवन की परिस्...
किस से कहूं
भ्रमित ना हो
लॉक डॉउन और ह...
अकेलापन और लॉ...
अरे वो तो अशुअंचल है देख सको तो देखे कविता रो रही है। अरे वो तो अशुअंचल है देख सको तो देखे कविता रो रही है।
वक्त के अंधड़ ने, अजब कहर ढहाया है। वक्त के अंधड़ ने, अजब कहर ढहाया है।
ताउम्र रस बरसे और कुदरत हमें, साथ ले जाये। ताउम्र रस बरसे और कुदरत हमें, साथ ले जाये।
आश्रयस्थल होकर भी वीरान हूं ! यही मेरी नियति है ! आश्रयस्थल होकर भी वीरान हूं ! यही मेरी नियति है !
जीवन की गली से गुजरने का शौक है मेरा देख लेता हूँ मैं जीवन का सब कुछ उसकी गली से गुजरते हुये। जीवन की गली से गुजरने का शौक है मेरा देख लेता हूँ मैं जीवन का सब कुछ उसकी गली...
छोड़ दे मुखौटे का साथ ओर जी ले सिर्फ अपने जज्बात। छोड़ दे मुखौटे का साथ ओर जी ले सिर्फ अपने जज्बात।
अब इस जख्म को मैं अपनी रूह में सजाऊंगी। अब इस जख्म को मैं अपनी रूह में सजाऊंगी।
कितना भी पकड़ लो, फिसलता रहता हूं, मैं वक्त हूं जनाब ! बदलता रहता हूं। कितना भी पकड़ लो, फिसलता रहता हूं, मैं वक्त हूं जनाब ! बदलता रहता हूं।
पूरी कायनात पर छा गई है आज हर एक माँ की तरह। पूरी कायनात पर छा गई है आज हर एक माँ की तरह।
ये था मेरा अकेला सफर एक दुर्गम पहाड़ी तक का। ये था मेरा अकेला सफर एक दुर्गम पहाड़ी तक का।
ये बूँदें उसकी सिक्कों में बदल गयीं। ये बूँदें उसकी सिक्कों में बदल गयीं।
अपने चाहे दुनिया छोड़ें नहीं छूटता पर ऊँचा पद। अपने चाहे दुनिया छोड़ें नहीं छूटता पर ऊँचा पद।
ए जिंदगी आज कल तू बहुत लंबी लगने लगी हैं। ए जिंदगी आज कल तू बहुत लंबी लगने लगी हैं।
देश की ख़ातिर इतना तो बनता मेरा भी कुछ फ़र्ज़ है। देश की ख़ातिर इतना तो बनता मेरा भी कुछ फ़र्ज़ है।
नफ़रत और स्वार्थ का लहू वो स्वयं को स्वाहा कर जायेगा। नफ़रत और स्वार्थ का लहू वो स्वयं को स्वाहा कर जायेगा।
कोशिश मेरी तो दुरुस्त ही थी, सब गलत निकले क़ियास मेरे, सलाहियत मेरी नुमाया ना है, कोशिश मेरी तो दुरुस्त ही थी, सब गलत निकले क़ियास मेरे, सलाहियत मेरी नुम...
विद्या के मन्दिरों में, देवी सरस्वती के साथ निवास करती है चंचला। विद्या के मन्दिरों में, देवी सरस्वती के साथ निवास करती है चंचला।
उन उदास आंखों की मस्ती में उदास मलंग बन मीरा की रुबाई सा और सूरदास की भक्ति सा मेरा इश्क़ तुम्... उन उदास आंखों की मस्ती में उदास मलंग बन मीरा की रुबाई सा और सूरदास की भक्ति ...
किसी और की नहीं बस आपकी ही जरूरत होती। किसी और की नहीं बस आपकी ही जरूरत होती।
दोनों बिछुड़ कर विधाता की लेखनी है ! दोनों बिछुड़ कर विधाता की लेखनी है !