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Shivambika Goel

Romance

5.0  

Shivambika Goel

Romance

कहानी

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याद नहीं ये कब हुआ

कैसे हुआ

बस यूँह समझलो

मेरी हाथों की लकीरों में

तुम्हारा साथ होना तय था

अरे पागल पागल फिर्ती हूँ

समझ ही नहीं आता कि

तुम सामने खड़े हो या सपनों में हो

पहले सारे शेर बेकार लगते थे

अब ऐसा लगता है कि

जैसे मेरी ही कहानी बयान कर रहे हो

दिन भी तू ही है मेरा और शम्मा भी मेरी तू ही है

तू ही है साँस मेरी,मेरे कण कण में तू ही है

अगर तू जिंदगी है मेरी तो मौत भी तू ही है

जब पास तुम्हारे होती हूँ

अपने दिल कि हर धड़कन का

अहसास होता ह मुझे

ऐसा लगता है कि जैसे

कह रही हो इसी के लिए जीना है तुझे

कहने को तो बहुत ऐब है मुझमे लेकिन

जाने तेरे आते ही किसी चीज़ की सुध ही नहीं

रहती है जैसे तूफ़ान में फसी कश्ती को किनारा सा मिल गया हो


तेरी हर हरकत कि गवाह बनना चाहती हूँ मैं

तेरी हर साँस को महसूस करना चाहती हूँ मैं

तेरे हर आँसू को तेरी जीत मैं बदलते देखना चाहती हूँ मैं

अरे यार तो बहुत होंगे तेरे

तेरी हमनवा बनना चाहती हूँ मैं

तेरे हर दर्द को जीना चाहती हूँ मैं

तरी शौहरत की रेह्नुमा बनना चाह्ती हूँ मैं ||


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