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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

कौन मेरा है

कौन मेरा है

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इस स्वार्थी दुनिया मे कौन मेरा है

सब कुछ ख़्वाबों वाला सवेरा है।


ये पत्नी, बाल-बच्चे, माता-पिता,

सबकुछ जोगी वाला एक फेरा है।


मुसीबत में सब मुँह फेर लेते हैं,

एक मेरे दाता तेरा ही सच्चा डेरा है।


बाकी सकल जग एक झूठा चेहरा है

ये साखी कह रहा है अपने अनुभव से।


लेकर कसम ख़ुदा की कह रहा दिल से

छोड़ दो इस मोह माया जाल को साथी।


यहां पर ये जिस्म किराये का तेरा है

सारा जग पानी बुदबुदा केरा है।


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