काश तुम मेरी होती
काश तुम मेरी होती
काश तुम मेरी होती तो ये गम ना होता यूं मैं राहों में अकेला ना होता
तुम साथ नहीं हो पर तुम्हारी यादें मेरे साथ है उन्हें सोचते गुजरते मेरे दिन - रात है।
तू क्यों मेरे ख्वाबों मैं है क्यों मेरे हाथों की लकीरो में नहीं है।
वो तेरी प्यारी सी मुस्कुराहट को सोच में अपना सारा गम भूल जाता हूँ पर क्यों मैं तुझे नहीं भूल पता हूँ|
तुझे एक पल भी ना सोचूं तो मेरा दिल तड़पता है तेरी एक नजर को ये हर दिन तरसता है।
लेकर तेरी यादों की किताब मैं यूं ही फिरता रहूंगा तेरे बिना भी मैं तुझसे ही प्यार करता रहूंगा।
काश तुम मेरी होती तो ये सब गम ना होता। यूं मैं राहों में अकेला ना होता ।

