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अच्युतं केशवं

Abstract

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अच्युतं केशवं

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कांटे हैं तो चुभते होंगे

कांटे हैं तो चुभते होंगे

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कांटे हैं तो चुभते होंगे, अब अहसास नहीं होता है

"ब्रूटस तुम भी" हमको मरकर, भी विश्वास नहीं होता है।


खुदगर्जी से खुदगर्जी तक, सम्बन्धों की सीमा रेखा

रिश्ते-नाते तबतक चलते, जब-तक लेनदेन का लेखा

इसके आगे जग में कोई,अपना ख़ास नहीं होता है

कांटे हैं तो चुभते होंगे,अब अहसास नहीं होता है।


कंठ लगाना प्यार जताना, ये सब तो फन है जीने का

वरना किसको शौक पड़ा है, औरों के आँसू पीने का

दिल के पास जताने वाला, दिल से पास नहीं होता है

कांटे हैं तो चुभते होंगे, अब अहसास नहीं होता है।


कुछ ही भागों वाले पग जो, सपनों के पथ पर चलते हैं

और यहाँ कुछ हम जैसे हैं, जो खुद ही खुद को छलते हैं

जीवनभर जीवन जीने का, भी अवकाश नहीं मिलता है

कांटे हैं तो चुभते होंगे, अब अहसास नहीं होता है।


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