STORYMIRROR

Dr Javaid Tahir

Abstract

3  

Dr Javaid Tahir

Abstract

कान्हा

कान्हा

1 min
248

गोविन्दा के मुख पर आया माखन का आलिंगन

मैं भी ऐसे ही पाऊं वासुदेव का आलिंगन


प्रात: कर सूर्य ने जन जन का उद्धार किया

कान्हा की महिमा का वर्णन भक्ति का है आलिंगन


शोभित है कण कण में मूरत मेरे मुरली की

बनवारी पर है, जन जन का आलिंगन


श्याम तुम्हारे नैनों से हो मेरे प्राणों का संगम

तालों को मिल जाये जैसे वर्षा का आलिंगन


कंकर कंकर आतुर है जीवन का रस पाने को

मुरलीधर की मुरली का प्राणों से आलिंगन


श्रृंगार की पूरक धरती नभ से अब तक वंचित है

मैंने तो प्रभु से पाया सुन्दरता का आलिंगन


जीवन मृत्यु तू ही जाने मेरे बस मैं क्या कान्हा

समस्त भाव मेरा तो है बस तेरा आलिंगन


आलिंगन, आलिंगन कृष्ण तेरा आलिंगन

भक्तों पा लो प्रभु से सुख का केवल आलिंगन



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract