STORYMIRROR

Sneha Kale

Classics Inspirational

3  

Sneha Kale

Classics Inspirational

कान्हा

कान्हा

1 min
266

कान्हा की आँखें है प्यारी प्यारी

जिसपे हर गोपी भयी दिवानी


कान्हा के मुख पे हंसी जो आए

गोपियोंका सूद-बुद खो जाए


कान्हा जब मुरली बजाए

गोपियां दौडी चली आए


कान्हा जब माखन चुराए

गोपियों का मन भी चुराए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics