STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

3  

Shailaja Bhattad

Abstract

कागज़ की नाव

कागज़ की नाव

1 min
120

पानी साफ है या गंदा।

 किसे कब फर्क पड़ता है।

 नियम कागजों पर बनते हैं।

 कागजों की नाव बनती है।


नाव गंदी हुई या साफ रही।

तैर गई काफी है।

उन्नति हुई या अवनति।

गति हुई काफी है।


बेसबब शहर आ गए।

 बेसबब जिंदगी न बनाइए। 

वक्त थमने से पहले,

 गांव अपने लौट आइए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract