जँहा गणपति विराजे
जँहा गणपति विराजे
जँहा गणपति विराजे ,वँहा मूषक नाचे,
मूषकराज सबको बुलाते, लड्डूवन पर ललचाते,
खेल-खेल में सबको हँसाते,अकड़ बहुत दिखाते,
विघ्नहर्ता के वाहनमय, शुभारम्भ काज सफल बनाते!
जँहा गणपति विराजे, वहां मोरनी नाचे,
मोरनी की मधुरता में सब सपनों में खो जाते,
पंख फैलाकर सबको बुलाते,अपना नाच दिखाते,
बरसात के सूचकमय, संदेश को पहुंचाते!
जँहा गणपति विराजे, वहां हाथी नाचे,
गजराज है सबके प्रिय, झूम-झूम इठलाते,
मदमस्त मलंग है चलते, खड़े-खड़े ही सो जाते,
भाग्य-समृद्धि के प्रतीकमय, स्मृति-ज्ञान पारंगत बनाते!
जँहा गणपति विराजे,वहां गय्या भी नाचे,
गौ माता की तीक्ष्ण ध्वनि, सब खींचे चले जाते,
गोवर्धन से जगत पले, विशुद्ध हवा भरपाते ,
शंकर के गौरी नंदन गणेश के प्यारे,पृथ्वी पर पूजे जाते!
