जल प्रकृति और पर्यावरण
जल प्रकृति और पर्यावरण
एक कहानी, बहुत पुरानी
एक था राजा और उसकी बहुत ही खूबसूरत -सी रानी
रानी को कुछ मर्ज़ हुआ
राजा तकलीफ़ में हुआ
राज - हकीम बुलवाया ,
रानी का खूब इलाज करवाया
रानी का स्वास्थ्य गिरता जाता था
कोई कुछ समझ न पाता था
फिर एक सिद्ध पुरुष आया
उसने राजन को समझाया
नहीं तुम्हारे महल में हवा ताज़ी
न है पेड़ो की हरियाली
पानी की किल्लत है ,
आपकी रियासत में न पक्षियों का कलरव है
राजा कुछ परेशान हुआ
मंत्री- श्रेष्ठ का आना हुआ
राजा ने तकलीफ़ बताई
रियासत की जानकारी मंगवाई
तब राजा को सारी बात समझ में आयी
वृक्षों का रोपण करवाया
पक्षियों ने तब राजा के रियासत में घोसला बनाया
रानी पक्षियों की आवाज़ सुन हँसती थी
वो अब पहले -सी खूबसूरत लगती थी
पानी के लिए कुएँ खुदवाये
बारिश के पानी को रोकने के इंतज़ाम करवाए
बत्तख - मेंढक ने पानी में अपने घर बनाये
रानी सबसे बातें करती थी
बहुत खुश अब रहती थी
राजा को अब समझ आया
जल ,प्रकृति, और पर्यावरण से है मानवता पर ख़ुशी का साया
आओ हम सभी ये सीख अपनाएँ
जल के महत्त्व को सबको समझाएं
वृक्ष लगाएं , पक्षियों का कलरव सुनते जाएँ
अपने पर्यावरण को स्वच्छ बनाएँ.
