Mohni Shriwas
Children
जिसने सारा जगत बनाया,
जिसने सूरज चाँद बनाया,
जिसने तारो को चमकाया.
जिसने बागों को महकाया,
जिसने सारा जगत बनाया l
हम उस ईश्वर के गुण गाए ,
उसे प्रेम से शीश झुकाएं l
साफ-सफाई और स...
आओ भैया पेड़ ल...
जामुन
फल
गुब्बारे वाला
सब्जी
मोर
गुणकारी सब्जि...
सब्जी वाला
दीवाली
पढ़ने दो-लिखने दो इनको आगे बढ़ने दो, पढ़ने दो-लिखने दो इनको आगे बढ़ने दो,
जब होता था बुखार, तब माँ हो जाती थी परेशान। तब रात - रात भर जागकर हमें सहलाती थी माँ। जब होता था बुखार, तब माँ हो जाती थी परेशान। तब रात - रात भर जागकर हमें सहलात...
आँखों में छवि चित्रों की बनाकर, नए विषय पर कविता लिखकर आँखों में छवि चित्रों की बनाकर, नए विषय पर कविता लिखकर
कभी प्यार से कभी दुलार से दांत डपट भी कभी बचाती छतरी माँ की। कभी प्यार से कभी दुलार से दांत डपट भी कभी बचाती छतरी माँ की।
न कोई जानता था पहले क्या है यंत्र, आज बनने लगे हैं मानव यंत्र न कोई जानता था पहले क्या है यंत्र, आज बनने लगे हैं मानव यंत्र
दुवाओं का समुंदर है आशीर्वाद का घर है उम्मीदो का आसमान है। दुवाओं का समुंदर है आशीर्वाद का घर है उम्मीदो का आसमान है।
बारिश में आंचल का बना देती छाता मां बारिश में आंचल का बना देती छाता मां
शोर मचाते झटपट सरपट। कोरोना कह भागा लल्ला। शोर मचाते झटपट सरपट। कोरोना कह भागा लल्ला।
रात में क्यों पीकर आते हो पापा रात में क्यों पीकर आते हो पापा
सुन लो उसकी भी पुकार दे दो उसको थोड़ा सा प्यार सुन लो उसकी भी पुकार दे दो उसको थोड़ा सा प्यार
ना हिन्दू था ना मुसलमान था वो गरीब परिवार में जन्मा, ना हिन्दू था ना मुसलमान था वो गरीब परिवार में जन्मा,
बचपन से आज तक गुरु बनी रही, हर तकलीफ हमारे लिए सहती रही बचपन से आज तक गुरु बनी रही, हर तकलीफ हमारे लिए सहती रही
सब मिल जो चलते साथ दुनिया मुट्ठी में होने का होता एहसास। सब मिल जो चलते साथ दुनिया मुट्ठी में होने का होता एहसास।
अपने मन का कोई खेल जो पसंद हो वो चुन लो। अपने मन का कोई खेल जो पसंद हो वो चुन लो।
और दादा-दादी जी से, मम्मी-पापा से सब पाते। और दादा-दादी जी से, मम्मी-पापा से सब पाते।
चोरों के ये भारी दुश्मन परिवार में लगता अपनापन चोरों के ये भारी दुश्मन परिवार में लगता अपनापन
हर "मां" को अपने बच्चे लगते जिगर के टुकड़े, हर "मां" को अपने बच्चे लगते जिगर के टुकड़े,
शीत ऋतु की हो रही है विदाई ग्रीष्म ऋतु की आहट है आई। शीत ऋतु की हो रही है विदाई ग्रीष्म ऋतु की आहट है आई।
कभी दर्द हो तो रोना नहीं चाहिए, हँसते हुए दर्द सह जाना चाहिए। कभी दर्द हो तो रोना नहीं चाहिए, हँसते हुए दर्द सह जाना चाहिए।
अवतरण दिवस के मौके पर सब से आशीर्वाद पाई है अवतरण दिवस के मौके पर सब से आशीर्वाद पाई है