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Anil Yadav

Tragedy Crime

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Anil Yadav

Tragedy Crime

जिस्म-ए-भूख

जिस्म-ए-भूख

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जिस्म-ए-जुनून हर रोज़ उसे खाता रहा,

वो अपनी ताक़त से मुझे आजमाता रहा!

मैंने भी उसे मक़बरे में तड़पता छोड़ दिया,

जो रूह-ए-इश्क़ नहीं जिस्म-ए-भूख मिटाने आता रहा!!


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