Anil Yadav
Tragedy Crime
जिस्म-ए-जुनून हर रोज़ उसे खाता रहा,
वो अपनी ताक़त से मुझे आजमाता रहा!
मैंने भी उसे मक़बरे में तड़पता छोड़ दिया,
जो रूह-ए-इश्क़ नहीं जिस्म-ए-भूख मिटाने आता रहा!!
उसे चाहने की ...
किसी को चुना ...
तेरी सूरत है
दीदार-ए-इंतज़...
सुकून
मैं तो एक लफ़...
तुम्हें एक बा...
कभी खोना नहीं...
दिलवाले हो गए
ज़रूरी है क्य...
इस स्थिति में कैसे कह दूं कि देश में अमन - शांति बहाल है? इस स्थिति में कैसे कह दूं कि देश में अमन - शांति बहाल है?
बहुत बड़ी चीज़ है जो उसने कर ली !! बहुत बड़ी चीज़ है जो उसने कर ली !!
क्या पाती हैं बेटियां बहू बनकर छोड देना चाहिए घर अजनबी बन कर. क्या पाती हैं बेटियां बहू बनकर छोड देना चाहिए घर अजनबी बन कर.
जिन्हें हम फौलाद समझते रहे वो मोम से भी ज्यादा तरल निकले । जिन्हें हम फौलाद समझते रहे वो मोम से भी ज्यादा तरल निकले ।
स्त्री को महसूस होती है एक शख़्स की कमी। स्त्री को महसूस होती है एक शख़्स की कमी।
पुरस्कार पाना भाग्य है तो अच्छा मित्र मिलना सौभाग्य है जो आपका हमेशा साथ देते हैं। पुरस्कार पाना भाग्य है तो अच्छा मित्र मिलना सौभाग्य है जो आपका हमेशा साथ देते है...
तुम और मैं पति पत्नी थे॥ तुम माँ बन गईं, मैं पिता रह गया। तुम और मैं पति पत्नी थे॥ तुम माँ बन गईं, मैं पिता रह गया।
अब जाना हमने लोग क्यों मुकर जाते हैं बेचारे टूट कर इश्क़ में हद से जो बिखर जाते हैं अब जाना हमने लोग क्यों मुकर जाते हैं बेचारे टूट कर इश्क़ में हद से जो बिखर जा...
यह भय होता है न, मित्रों बड़ा ही नीच भय जीतो, फ़लक भी लोगे तुम खरीद। यह भय होता है न, मित्रों बड़ा ही नीच भय जीतो, फ़लक भी लोगे तुम खरीद।
कुछ हूँ जितना उसको पाया है और कि तरह उसको गिरा कर खुद को उठाया। कुछ हूँ जितना उसको पाया है और कि तरह उसको गिरा कर खुद को उठाया।
बात है लड़की के सम्मान की पर दोषी भी उसी को ठहराता है बात है लड़की के सम्मान की पर दोषी भी उसी को ठहराता है
बंद हो ये खिलवाड़ सारा नारी कैद से आज़ाद हो। बंद हो ये खिलवाड़ सारा नारी कैद से आज़ाद हो।
कांधे पे लादे गठरी कुछ दो चार,अपने संग लिए भूखे परिवार। कांधे पे लादे गठरी कुछ दो चार,अपने संग लिए भूखे परिवार।
वो घाव याद आते हैं, तो दिल में दर्द दे जाते हैं। वो घाव याद आते हैं, तो दिल में दर्द दे जाते हैं।
नेताजी में मजदूर बोल रहा हूं। आज होकर मजबूर बोल रहा हूं। नेताजी में मजदूर बोल रहा हूं। आज होकर मजबूर बोल रहा हूं।
पीहर की मिट्टी का सोंधा मंज़र ताज़िंदगी तरोताजा रहता है। पीहर की मिट्टी का सोंधा मंज़र ताज़िंदगी तरोताजा रहता है।
बापू, फिर एक बार आ जाओ तुम बापू, फिर एक बार आ जाओ तुम। बापू, फिर एक बार आ जाओ तुम बापू, फिर एक बार आ जाओ तुम।
कैसे समझाऊं इस दिल को, ये दिल रह रह कर दुखता है।। कैसे समझाऊं इस दिल को, ये दिल रह रह कर दुखता है।।
अब उसमें ही तुम्हारा अक्स में देख लिया करूँगी।। देख देख कर उसको ही ये नीरस जीवन जी लिय अब उसमें ही तुम्हारा अक्स में देख लिया करूँगी।। देख देख कर उसको ही ये नीरस जी...
पर फिर भी न खत्म होती इन बच्चों के फ़ोन चलाने की चाहत पर फिर भी न खत्म होती इन बच्चों के फ़ोन चलाने की चाहत