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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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जिंदगी

जिंदगी

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दो पल की इस जिंदगी में,

रहे सदा 36 का आंकड़ा बनकर।


कभी खुद को रुलाकर

कभी दूसरों को सता कर।


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