STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

जिंदगी

जिंदगी

1 min
246

जिंदगी खिलखिलाने में है

मुँह लटकाने में नहीं है

जो यहाँ खिलखिलाते है

वो ही मंजिल को पाते है

जिंदगी मुस्कुराने में है

आंसू बहाने में नहीं है


वो ही खुशबू को पाता है

शूलों संग खिलता जाता है

जिंदगी समस्या से लड़ने में है

समस्या से भागने में नहीं है

झरना वही बनता है

जो पत्थरों से लड़ता है


जिंदगी संघर्ष करने में है

व्यर्थ के रोने-धोने में नहीं है

एक प्यारी सी मुस्कान,

समस्या की ले लेती जान,

जिंदगी हंसने-चहचहाने में है

आंसू में डुबोने के लिये नहीं है



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational