ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
ज़िंदगी ये बड़ी हैरान करती है,
नित नए-नए इम्तिहान लेती है,
चौंका देती हर घड़ी हर मोड़ पर,
जाने कितने ही रंग ये बदलती है,
कभी डुबा देती हमें दुःख के सागर में,
कभी खुशियों से सराबोर कर देती है,
ठोकरें भी देती ये अक्सर पग-पग पर,
कभी सखा बनकर भी संभाल लेती है,
सुख-दुख उतार-चढ़ाव दिखा कर ही,
जीवन पथ पर चलना हमें सिखाती है,
उलझी सी एक पहेली ज़रूर है ये ज़िन्दगी,
किंतु बड़े-बड़े मसले सुलझाया भी करती है,
हंँसाना और रूलाना यह तो ज़िन्दगी का काम,
कभी संगीत की ताल तो कभी भूचाल होती है,
कठिनाइयों और परेशानियों से भरी ये ज़िंदगी,
इतनी भी निष्ठुर नहीं एक मौका सबको देती है,
हर परिस्थिति में जो जीना सीख लेता है यहांँ,
ज़िंदगी मीत बनकर संग-संग उसके चलती है।
